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Varday Clinic
Dr. Rekha Bamania B.H.M.S.

सोरायसिस (Psoriasis) परामर्श | डॉ. रेखा बामणीआ

10 सितम्बर 2026 को Dr. Rekha Bamania, B.H.M.S. द्वारा समीक्षित

सोरायसिस क्या है?

सोरायसिस (Psoriasis) एक दीर्घकालिक और गैर-संक्रामक ऑटोइम्यून स्थिति है, जो त्वचा की कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया को असामान्य रूप से तेज कर देती है। सामान्य त्वचा में नई कोशिकाएं बनने और पुरानी हटने में लगभग एक महीने का समय लगता है, जबकि सोरायसिस में यह चक्र कुछ ही दिनों में पूरा हो जाता है। इस कारण अधपकी त्वचा कोशिकाएं तेजी से सतह पर जमा होने लगती हैं, जो मोटी, लाल और चांदी जैसी सफेद पपड़ियों (Plaques) का रूप ले लेती हैं। यह आमतौर पर कोहनी, घुटनों, खोपड़ी (स्कैल्प) और पीठ के निचले हिस्से पर दिखाई देता है।

सामान्य लक्षण

सोरायसिस के लक्षण त्वचा के प्रकार और प्रभावित हिस्से के अनुसार भिन्न हो सकते हैं:

  • लाल और उभरे हुए चकत्ते: त्वचा पर लाल धब्बे जो मोटी, चांदी जैसी चमकदार पपड़ी से ढके होते हैं।

  • रूखी और फटी हुई त्वचा: अत्यधिक रूखापन जिसके कारण त्वचा में दरारें पड़ सकती हैं और कभी-कभी खून भी आ सकता है।

  • खुजली और जलन: प्रभावित हिस्से पर लगातार तेज खुजली, खिंचाव या जलन महसूस होना।

  • नाखूनों में विकृति: नाखूनों पर छोटे गड्ढे पड़ना, उनका पीला-भूरा होना या किनारों से टूटना।

  • जोड़ों में अकड़न: कुछ मामलों में त्वचा के चकत्तों के साथ-साथ जोड़ों में दर्द और सूजन होना।

सामान्य कारण

सोरायसिस का मुख्य कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) में गड़बड़ी होना है, जिसमें टी-कोशिकाएं गलती से स्वस्थ त्वचा कोशिकाओं पर प्रतिक्रिया करने लगती हैं। इसके मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:

  • आनुवंशिक कारण (Genetics): परिवार में सोरायसिस या अन्य ऑटोइम्यून समस्याओं का इतिहास होना।

  • मानसिक और शारीरिक तनाव: अत्यधिक मानसिक दबाव अक्सर इस स्थिति को गंभीर बना देता है।

  • त्वचा की चोट (Koebner Phenomenon): त्वचा का कटना, छिलना, धूप से झुलसना या खरोंच लगना।

  • मौसम और जीवनशैली: शुष्क और ठंडा मौसम, संक्रमण (जैसे गले का गंभीर संक्रमण), और शराब या धूम्रपान का सेवन।

सावधानियां

दैनिक जीवन में सही देखभाल अपनाकर त्वचा की परेशानी को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकता है:

  • स्नान के तुरंत बाद सौम्य और बिना सुगंध वाले मॉइस्चराइजर का नियमित उपयोग करें।

  • पपड़ी को खींचकर या खुरचकर हटाने से बचें, क्योंकि इससे त्वचा पर चोट और नए चकत्ते बन सकते हैं।

  • गर्म पानी के बजाय गुनगुने पानी से स्नान करें ताकि त्वचा की प्राकृतिक नमी सुरक्षित रहे।

  • ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि चकत्तों पर रगड़ न लगे।

आहार संबंधी सलाह

संतुलित और सूजनरोधी (एंटी-इंफ्लेमेटरी) आहार त्वचा के स्वास्थ्य को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है:

  • आहार में शामिल करें: हरी पत्तेदार सब्जियां, अलसी के बीज, अखरोट, और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर मौसमी फल।

  • इनसे परहेज करें: अत्यधिक तला-भुना खाना, रिफाइंड चीनी, प्रोसेस्ड फूड, और अधिक नमक का सेवन सीमित करें।

  • व्यक्तिगत संवेदनशीलता पहचानें: कुछ लोगों को बैंगन, टमाटर या अत्यधिक डेयरी उत्पादों से परेशानी बढ़ सकती है; खान-पान की आदतों पर ध्यान दें।

  • पर्याप्त पानी पिएं: दिनभर भरपूर पानी पीकर शरीर और त्वचा में नमी बनाए रखें।

होम्योपैथिक औषधियों का उल्लेख (सावधानी के साथ)

होम्योपैथिक साहित्य में विभिन्न लक्षणों के आधार पर कई औषधियों का विवरण मिलता है। चेतावनी: यह जानकारी केवल शैक्षणिक और संदर्भ के उद्देश्य से दी गई है। इसे उपचार का नुस्खा न समझें। होम्योपैथी में दवा का चयन हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति के अनुसार अलग होता है; बिना योग्य चिकित्सक के परामर्श के दवा न लें।

  • आर्सेनिकम एल्बम (Arsenicum Album): इसका उल्लेख तब आता है जब त्वचा बेहद सूखी और पपड़ीदार हो, और हल्की गर्मी से खुजली में राहत महसूस होती हो।

  • ग्रेफाइट्स (Graphites): त्वचा की सिलवटों (joints folds) में होने वाले रूखेपन, मोटी पपड़ी या चिपचिपे स्राव के संदर्भ में इसका अध्ययन किया जाता है।

  • सल्फर (Sulphur): पारंपरिक रूप से अत्यधिक जलन, लालिमा और पानी या गर्मी के संपर्क से खुजली बढ़ने की स्थिति में इसका संदर्भ मिलता है।

  • पेट्रोलियम (Petroleum): सर्दियों के मौसम में अत्यधिक गहरी दरारें और त्वचा का अत्यधिक रूखापन होने पर इसका अध्ययन किया जाता है।

होम्योपैथिक परामर्श में क्या देखा जाता है?

डॉ. रेखा बामणीआ के साथ परामर्श में केवल बाहरी लक्षणों को दबाने के बजाय व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य का विश्लेषण किया जाता है:

  • चकत्तों का विस्तृत अध्ययन: पपड़ियों की बनावट, स्थान, मौसम के प्रभाव और व्यक्तिगत संवेदनशीलताओं की जांच।

  • प्रतिरक्षा और चयापचय की स्थिति: पुरानी बीमारियों, पाचन तंत्र, तनाव के स्तर और आनुवंशिक कारकों की समीक्षा।

  • संवैधानिक विश्लेषण (Constitutional Evaluation): शारीरिक प्रकृति, तापमान सहनशीलता और मानसिक प्रवृत्तियों का समग्र अध्ययन।

  • देखभाल की दीर्घकालिक योजना: व्यक्तिगत आदतों, त्वचा की सुरक्षा और फॉलो-अप के लिए दिशा-निर्देश।

तुरंत डॉक्टर से संपर्क कब करें?

यद्यपि सोरायसिस एक दीर्घकालिक समस्या है, लेकिन निम्नलिखित गंभीर लक्षणों में तुरंत आपातकालीन चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए:

  • यदि लालिमा और त्वचा का छिलना शरीर के अधिकांश हिस्से (80-90% से अधिक) पर तेजी से फैल जाए (एरिथ्रोडर्मिक सोरायसिस)।

  • पपड़ियों के साथ-साथ त्वचा पर मवाद से भरी फुंसियां बनने लगें, तेज बुखार आए और कपकंपी छूटे (पस्ट्यूलर सोरायसिस)।

  • त्वचा में तीव्र दर्द, तेज सूजन या जीवाणु संक्रमण (बैक्टीरियल इन्फेक्शन) के लक्षण दिखाई दें।

  • जोड़ों में अचानक असहनीय दर्द और सूजन हो जाए, जिससे चलना-फिरना कठिन हो जाए।

मरीज़ पूछते हैं

क्या सोरायसिस एक संक्रामक बीमारी है जो छूने से फैलती है?
नहीं, सोरायसिस बिल्कुल भी संक्रामक नहीं है। यह शरीर की आंतरिक रोग प्रतिरोधक प्रणाली और आनुवंशिक कारणों से जुड़ी स्थिति है, जो किसी के संपर्क में आने से नहीं फैलती।
डॉ. रेखा बामणीआ के क्लिनिक में सोरायसिस के परामर्श के दौरान किन बातों पर ध्यान दिया जाता है?
परामर्श के दौरान आपके चकत्तों के स्वरूप, मौसम के प्रभाव, आनुवंशिक इतिहास, पाचन, तनाव के स्तर और त्वचा के रूखेपन का विस्तृत अध्ययन किया जाता है।
क्या सोरायसिस त्वचा के अलावा नाखूनों और जोड़ों को भी प्रभावित कर सकता है?
हाँ, सोरायसिस के कारण नाखूनों में गड्ढे या रंग बदलना देखा जा सकता है, और कुछ मामलों में यह जोड़ों के दर्द और सूजन (सोराएटिक आर्थराइटिस) से भी जुड़ा हो सकता है।
त्वचा संबंधी परामर्श के बाद नियमित फॉलो-अप कितने समय बाद होता है?
त्वचा की कोशिकाओं के बनने के चक्र को समझने के लिए आमतौर पर 2 से 5 सप्ताह के अंतराल पर फॉलो-अप रखा जाता है ताकि त्वचा के समग्र बदलावों का सटीक आकलन किया जा सके।

यह वेबसाइट प्रैक्टिस के बारे में सामान्य जानकारी देती है और यह व्यक्तिगत चिकित्सीय सलाह या निदान नहीं है। अपनी स्थिति के बारे में कृपया डॉ. बामणीआ, या किसी अन्य योग्य चिकित्सक, से परामर्श लें। आपात स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

आइए और इस पर बात कीजिए।

डॉ. बामणीआ वडोदरा की दोनों क्लिनिकों में गुजराती, हिंदी या अंग्रेज़ी में मरीजों को देखती हैं। फोन करें या संदेश भेजें, और आप सीधे प्रैक्टिस तक पहुँचेंगे।